रात सितारे और मैं

उदास बैठे थे, छत पे, रात सितारे और मैं
बदनाम मुफ्त में हो गये रात सितारे और मैं

मजबूर हसते रहे हम युं ही फिर किस्मत पे
बस गुनाह ये करते रहे रात सितारे और मैं

हर लम्हा एक तेरे बारे में ही तो सोंचते थे हम
तलातूम दिल में दबाये थे रात सितारे और मैं

आजा के अब रात भी तहलील होनेवाली हैं
कब तक तेरा रस्ता देखे रात सितारे और मैं

अब ये मय भी काम आती नहीं ग़म भुलाने में
दर्द सारे खामोश ही हैं सहते रात सितारे और मैं

 
                                                         ~Anushthi

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